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अगले कुछ महिनों में कच्चे ऑयल की मूल्य100 डॉलर के पार, राष्ट्र में बढ़ेगी महंगाई

अगले कुछ महिनों में कच्चे ऑयल की मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. गाड़ियों के लिए मोबिल तेल बनाने वाली विश्व की प्रमुख फ्रेंच कंपनी टोटल के सीईओ पेट्रिक पोयान्ने ने संभावनाजताई है कि इसके लिए विश्व भर हो रही जियोपॉलिटिकल घटनाएं जिम्मेदार हैं.
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भारत में बढ़ेगी महंगाई
विश्व में क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है. कच्चे ऑयल के बढ़ने से हिंदुस्तान में भी पेट्रोल अगले कुछ दिनों में 95 रुपये के पार जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो फिर इसके चलते महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ सकती है. पेट्रोलियम कंपनियों की माने तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल में साढ़े चार रुपये  डीजल में चार रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी होगी.

चुनाव समाप्त होने के बाद से पेट्रोल में 69 पैसे प्रति लीटर  डीजल में 86 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जा चुकी है. इसके बावजूद पेट्रोलियम कंपनियों को प्रति लीटर 2.70 रुपये का न्यूनतम मार्जिन भी नहीं मिल रहा है.

कंपनियों का घट गया मार्जिन
कंपनियों का कहना है कि चुनाव से पहले 24 अप्रैल को आखिरी बार जब पेट्रोल की मूल्य बढ़ाई गई थी तब अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में पेट्रोल की मूल्य 74.84 डॉलर प्रति बैरल थी जो अब बढ़ कर 83.30 डॉलर बैरल हो गई है. इसकी वजह से उनका प्रति लीटर मार्जिन घटकर 0.31 पैसे रह गया है. बता दें कि चुनाव समाप्त होने के बाद पहली बार 14 मई को पेट्रोलियम उत्पादों में मूल्यवृद्धि की गई थी.इससे पहले मूल्य वृद्धि नहीं करने की वजह से कंपनियों को 500 करोड़ की चपत लग चुकी है.

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ईरान पर प्रतिबंध से पड़ेगा असर

इराक  साऊदी अरब के बाद ईरान कच्चे ऑयल का हिंदुस्तान में सबसे बड़ा सप्लायर है. प्रतिबंध लगने के बाद पूरी संसार में कच्चे ऑयल का दाम बहुत ज्यादा बढ़ सकते हैं. डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता जा रहा है, जिसके चलते हिंदुस्तान गवर्नमेंट पर बोझ बढ़ेगा.

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कच्चे ऑयल की मूल्य भी इस वक्त 80 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गई है.  फरवरी में हिंदुस्तान यात्रा पर आए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के बाद हिंदुस्तान ने कच्चे ऑयल के आयात को बढ़ा दिया था.

आप पर पड़ेगा यह असर
अगर कच्चा ऑयल  महंगा होता तो फिर राष्ट्र में पेट्रोल-डीजल का दाम भी बढ़ जाएगा, जिससे आम लोगों के दैनिक ज़िंदगी पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ेगा. डीजल बढ़ने से जहां शहरों में दूध, फल, सब्जियां महंगी हो जाएंगी, वहीं दूसरी तरफ आना-जाना भी बढ़ जाएगा.

रुपये में कमजोरी
वहीं रुपया भी 66.87 के स्तर पर कारोबार करते हुए देखा गया. ब्रेंट क्रूड करीब 6 प्रतिशत चढ़कर 83 डॉलर के करीब निकलने में सफल रहा. डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे टूटकर 67.05 के स्तर पर आ गया. रुपये का यह स्तर बीते 15 महीने का निचला स्तर है. आखिरी बार रुपये का यह स्तर फरवरी 2017 को देखा गया था. बीते शुक्रवार को रुपया 22 पैसे टूटकर 66.86 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ था.

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