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कर्नाटक: सत्‍ता संघर्ष में निर्दलीय MLA की चांदी

कर्नाटक में बीएस येदियुरप्‍पा के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद बीजेपी के सामने अब बहुमत का आंकड़ा जुटाना सबसे बड़ी चुनौती है क्‍योंकि पार्टी के पास इसके लिए आठ विधायकों की कमी है. 222 विधायकों में से बीजेपी को बहुमत के लिए 112 विधायकों की दरकार है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस(78)और जेडीएस(38) गठबंधन के पास 116 विधायकों का समर्थन है. इस लिहाज से अब एक-एक विधायक का समर्थन जरूरी हो गया है. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन जहां अपने विधायकों को पाला बदल की स्थिति से रोकने के लिए मशक्‍कत कर रहे हैं, वहीं बीजेपी की नजर इन विधायकों के साथ-साथ जीतने वाले दो निर्दलीय विधायकों पर भी है.

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अब ये दो निर्दलीय एमएलए आर शंकर और एच नागेश दोनों ही धड़ों के लिए बेहद अहम हो गए हैं. लेकिन इन विधायकों की निष्‍ठाओं पर अभी तक स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं हो पा रही है क्‍योंकि इनमें से एक आर शंकर 16 मई की सुबह बीजेपी को समर्थन देने की घोषणा करते हुए पार्टी नेता बीएस येदियुरप्‍पा के आवास पर देखे गए. वहीं शाम को कर्नाटक कांग्रेस के दफ्तर में नजर आए और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पक्ष में समर्थन की घोषणा कर दी. शंकर कर्नाटक की रानेबेन्‍नूर विधानसभा सीट से जीते हैं.

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इसी तरह दूसरे निर्दलीय विधायक एच नागेश पर भी दोनों दलों की नजर है. मुलगाबल विधानसभा सीट से नागेश जीते हैं. वह कांग्रेस के समर्थक थे और इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन कांग्रेस ने अपने एमएलए जी मंजूनाथ को ही दोबारा टिकट दे दिया. हालांकि बाद में कर्नाटक हाई कोर्ट ने पाया कि मंजूनाथ ने अपनी जाति के बारे में झूठ बोला है, सो उनकी उम्‍मीदवारी खारिज कर दी गई. लिहाजा ऐसे में निर्दलीय प्रत्‍याशी के रूप में उतरे नागेश को कांग्रेस ने समर्थन दे दिया. नागेश ने कांग्रेस-जेडीएस धड़े को समर्थन देने की बात कही है और 16 मई को कुमारस्‍वामी ने इस धड़े की तरफ से जब राज्‍यपाल को अपना समर्थन पत्र सौंपा तो उसमें 117 विधायकों के नाम थे. माना जाता है कि उनमें से एक नाम नागेश का था. हालांकि अभी तस्‍वीर पूरी तरह से साफ नहीं है.

लिंगायत कार्ड पर टिक सकता है दारोमदार
इस बीच यदि कोर्ट शुक्रवार को अपनी सुनवाई में कहता है कि बीजेपी को सबसे बड़े दल के रूप में पहले सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का राज्‍यपाल का फैसला सही है और राज्‍यपाल के द्वारा दी गई 15 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर बीजेपी को अपना बहुमत साबित करना होगा तो बीजेपी लिंगायत सम्‍मान के मुद्दे के आधार पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकती है. चूंकि बीएस येदियुरप्‍पा लिंगायत समुदाय से ताल्‍लुक रखते हैं. लिहाजा बीजेपी अभी से यह कह रही है‍ कि इस समुदाय के नेता को सत्‍ता में पहुंचने से रोकने के लिए कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन किया है.

कर्नाटक: सत्‍ता के लिए जातीय संघर्ष के कारण आमने-सामने हैं येदियुरप्‍पा और कुमारस्‍वामी!

इस आधार पर BJP लिंगायतों के सम्‍मान को एक मुद्दा बनाने के मूड में है और इस आधार पर कांग्रेस और जेडीएस के लिंगायत समुदाय से ताल्‍लुक रखने वाले विधायकों से येदियुरप्‍पा को समर्थन देने की अपील कर सकती है. उल्‍लेखनीय है कि कांग्रेस के टिकट पर 21 और JDS के टिकट पर 10 लिंगायत विधायक जीतकर आए हैं. ऐसे में जितने भी लिंगायत विधायक इन दलों से टूटकर बीजेपी में जाएंगे, उताना ही फायदा बीजेपी को होगा.

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