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गवर्नर ने बीजेपी को गवर्नमेंट बनाने का न्यौता दिया.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों में राज्य की जनता ने किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया है. 104 सीटें जीतने के बाद बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है. हालांकि कांग्रेस पार्टी  जेडीएस ने 117 विधायकों के समर्थन के साथ गवर्नमेंट बनाने का दावा पेश किया था लेकिन गवर्नर ने बीजेपी को गवर्नमेंट बनाने का न्यौता दिया. CM पद की शपथ लेने के बाद अब येदियुरप्पा के सामने सबसे बड़ा संकट सदन में विश्वासमत हासिल करने का है. यदि वह बहुमत हासिल करने में असफल रहे तो उन्हें अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ेगा. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी CM को इस तरह की हालात का सामना करना पड़ा हो. इससे पहले भी कुछ दिनों के लिए सरकारें बन चुकी हैं. आज हम आपको बताते हैं ऐसी ही कुछ सरकारों के बारे में जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया.

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1. वर्ष 2017 में हुए मणिपुर चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी लेकिन यहां बीजेपी पहली बार अपनी गवर्नमेंट बनाने में पास रही. बीजेपी ने एनपीएफ की 4, एनपीपी की 4  लोजपा के एक सदस्य के समर्थन से गवर्नमेंट बनाई  बीरेन सिंह CM बने.

2. वर्ष 2017 में कांग्रेस पार्टी को 17 जबकि बीजेपी को 13 सीटें मिली थी. इसके बावजूद बीजेपी के मनोहर पर्रिकर यहां गवर्नमेंट बनाने में सफल रहे. यहां राज्यरपाल मृदुला सिन्हा ने बीजेपी को गवर्नमेंट बनाने का न्यौता दिया  उसने एमजीपी, जीपीएफ  अन्य पार्टियों के समर्थन से गवर्नमेंटबनाई.

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3. वर्ष 2016 में तत्कालीन गवर्नर सैयद सिब्ते रजी ने झारखंड में शिबू सोरेन को गवर्नमेंट बनाने का न्यौता दिया था. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के समर्थन से 10 दिन की गवर्नमेंट बनाई थी क्योंकि वह सदन में विश्वासमत हासिल नहीं कर पाई थी. जिसके बाद उन्हें त्याग पत्र देना पड़ा था.

4. वर्ष 2013 में दिल्ली के तत्कालीन उप-राज्यपाल नजीब जंग ने बहुमत साबित ना कर पाने की स्थिति को देखते हुए बीजेपी को गवर्नमेंट बनाने का न्यौता देने से मना कर दिया था. उन्होंने राज्य की सबसे बड़ी पार्टी आम आदमी पार्टी को गवर्नमेंट बनाने के लिए आमंत्रण दिया. जिसने 28 दिसंबर 2013 को कांग्रेस पार्टी के समर्थन से गवर्नमेंट बनाई  अरविंद केजरीवाल CM बने.

5. वर्ष 1996 में यूपी में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद गवर्नमेंट केवल 39 सीटों से गवर्नमेंटनहीं बना पाई. उस समय कल्याण सिंह ने 67 सीटें जीतने वाली बसपा को अपना समर्थन दिया  6-6 महीने के लिए मुख्यमंत्री की शर्त के साथ मायावती को CM बना दिया. मगर अफसोस यह साझेदारी ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया  6 महीने बाद ही टूट गया.

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