Sunday , May 27 2018
Loading...

सुप्रीम न्यायालय ने एकतरफा शिकायत पर गिरफ्तारी को अनुचित कहा

अनुसूचित जाति-जनजाति कानून पर हाल के अपने निर्णय को उचित बताते हुए सुप्रीम न्यायालयने बोला कि एकतरफा शिकायत पर किसी को अरैस्ट करना अनुचित है  इसका अर्थ है कि हम सभ्य समाज में नहीं रह रहे हैं. शीर्ष न्यायालय ने यहां तक बोला कि संसद भी नागरिकों से ज़िंदगी जीने के अधिकार नहीं छीन सकती.

Image result for सभ्य समाज में एकतरफा शिकायत पर गिरफ्तारी गलत : सुप्रीम न्यायालय

शीर्ष न्यायालय ने 20 मार्च के आदेश को लेकर केंद्र गवर्नमेंट की पुनर्विचार याचिका पर बुधवार को अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया. न्यायालय ने इस मामले पर जुलाई में विस्तार से सुनवाई करने का फैसला लिया है. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल  न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा, ‘एक पक्ष की शिकायत पर यदि किसी नागरिक पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी रहे, तो इसका मतलब हम सभ्य समाज में नहीं जी रहे हैं. उचित प्रक्रिया अपनाए बिना गिरफ्तारी पर संसद ने भी रोक लगा रखी है.

केंद्र गवर्नमेंट की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल के न्यायालय से 20 मार्च के अपने निर्णय पर पुनर्विचार के आग्रह पर पीठ ने यह टिप्पणी की. अटॉर्नी जनरल ने बोला कि न्यायालयवैकल्पिक कानून नहीं बना सकती. पीठ ने बोला कि अनुच्छेद-21 (जीवन जीने और स्वच्छंदता का अधिकार) को कानून के हर प्रावधानों के साथ जोड़कर पढ़ने की आवश्यकता है.

इस पर अटॉर्नी जनरल ने बोला कि अनुच्छेद-21 का दायरा बढ़ गया है. इसके तहत भोजन एवं रोजगार का अधिकार भी शामिल हो गया है. उन्होंने बोला कि एक कल्याणकारी राज्य में सबके लिए यह अधिकार सुनिश्चित करना संभव नहीं है. सभी को रोजगार देना मुश्किल है. राष्ट्र में लाखों बेरोजगार हैं  जाने कितनों की फुटपाथ पर ही जिंदगी गुजर जाती है.

Loading...

जज पर टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई की मांग
बिजॉन कुमार मिश्रा द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर अटॉर्नी जनरल को योगदान करने के लिए बोला गया है. याचिका में बोला गया कि जिन लोगों ने 20 मार्च के आदेश  आदेश देने वाले जजों पर टिप्पणी करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई और जांच की मांग की गई है.

एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर सुप्रीम न्यायालय सख्त
सुप्रीम न्यायालय ने 20 मार्च को एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के दुरुपयोग को देखते हुए इस कानून के तहत मिलने वाली शिकायत पर स्वत: एफआईआर गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. साथ ही इसमें अग्रिम जमानत का प्रावधान भी जोड़ दिया था. सुप्रीम न्यायालय ने बोला था कि एफआईआर दर्ज करने से पहले जांच होनी चाहिए.

Loading...
यह भी पढ़ें:   आरक्षण के मुद्दे को लेकर बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले का, एक बार फिर दिया विवादित बयान