Friday , January 18 2019

सुप्रीम न्यायालय ने जाति व जनजाति कानून एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से फिर इंकार किया

 सुप्रीम न्यायालय ने अनुसूचित जाति  जनजाति कानून (एससी-एसटी एक्ट) पर अपने निर्णय में संशोधन करने से फिर इंकार कर दिया बुधवार को केंद्र गवर्नमेंट की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के समय जस्टिस आदर्श गोयल  यूयू ललित की खंडपीठ ने गंभीर टिप्पणी की, कि किसी नागरिक के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी रहे, तो समझिए कि हम सभ्य समाज में नहीं रह रहे हैं

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बता दें कि 20 मार्च को सुप्रीम न्यायालय ने एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत मिलने पर तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी न्यायालय का कहना था कि गिरफ्तारी से पहले प्रारंभिक जांच होनी चाहिए इसके अतिरिक्त भी कुछ आदेश दिए थे पीठ ने अनुच्छेद-21 (जीवन स्वतंत्रता के अधिकार) को हर हाल में लागू करने की बात की थी संसद भी इस कानून को समाप्तनहीं कर सकती है हमारा संविधान भी किसी आदमी की बिना कारण गिरफ्तारी की इजाजत नहीं देता यह मौलिक अधिकार का उल्लंघन है

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उल्लेखनीय है कि केंद्र गवर्नमेंट ने एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम न्यायालय के 20 मार्च के निर्णयको चुनौती दी है गवर्नमेंट ने इसके विरूद्ध पुनर्विचार याचिका दायर की है केंद्र का मत है कि सुप्रीम न्यायालय का निर्णय न्यायिक सक्रियता है कानून बनाना संसद का कार्य है केंद्र गवर्नमेंट की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी सुप्रीम न्यायालय के कई पुराने फैसलों का संदर्भ देते हुए बोला कि संसद द्वारा बनाए गए कानून को न्यायालय नहीं बदल सकती

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