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जीएसटी काउंसिल इन 3 मुद्दों पर कर सकती है चर्चा

जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग 4 मई को होनी है, यह काउंसिल की 27वीं मीटिंग होगी. GST काउंसिल में अरुण जेटली समेत अन्य राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक जेटली की बेकार तबियत के चलते यह मीटिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी. इस मीटिंग में किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है हम अपनी इस समाचार में आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं.

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रिटर्न प्रक्रिया को सरल बनाना: इस मीटिंग में रिटर्न प्रक्रिया को  सरल बनाए जाने का मुद्दा प्रमुख है. इससे पहले सुशील मोदी के नेतृत्व वाले जीओएम की ओर से GST काउंसिल के समक्ष पूर्व में रखे गए उन तीन मॉडल्स पर भी चर्चा की जानी है. मार्च में हुई GST काउंसिल की मीटिंग में GST रिटर्न के दो मॉडल्स पर चर्चा हुई थी  सुझाव दिया गया था कि जीओएम प्रक्रिया को  सरल बनाने की दिशा में कार्य करेगा. एक ऑफिसर ने बताया है कि एक बार GST काउंसिल की ओर से नए GST रिटर्न प्रारूप को मंजूरी मिलने के बाद कानून में भी संशोधन किया जाएगा. काउंसिल के समक्ष पेश किए गए मॉडल में से एक यह था कि जब तक करदाता रिटर्न फाइल नहीं करता है  कर नहीं चुकाता है तब तक उसे अस्थायी क्रेडिट नहीं दिया जाना चाहिए.

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सूत्रों के मुताबिक काउंसिल GST रिटर्न आसान बनाने के विषय में मंत्रीसमूह की सिफारिशों पर भी विचार करेगी. GST में मौजूदा जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-2  जीएसटीआर-3 की व्यवस्था की स्थान सिर्फ एक सिंगल पेज का रिटर्न का रखने के प्रस्ताव को भी काउंसिल अंतिम रूप दे सकती है. साथ ही काउंसिल यह भी तय करेगी कि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ड्यूटी फ्री क्षेत्र में खरीद पर GST की छूट का निर्णय भी कर सकती है.

जीएसटीएन को सरकारी कंपनी बनाने पर हो सकती है चर्चा: जीएसटीएन को सरकारी कंपनी बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए GST काउंसिल 4 मई को होने वाली मीटिंग में इस मुद्दे पर विचार करेगी. काउंसिल इस बात पर विचार करेगी कि जीएसटीएन में केंद्र  राज्यों की मौजूदा 49 फीसदी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 51 फीसदी से अधिक किया जाए या इसे सौ फीसदी गवर्नमेंट के स्वामित्व वाली कंपनी बनाया जाए. काउंसिल GST रिटर्न आसान बनाने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ड्यूटी फ्री क्षेत्र में खरीदारी को GST से छूट प्रदान करने का फैसला भी कर सकती है. जीएसटीएन नए कंपनी कानून की धारा 8 के तहत एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी के तौर पर पंजीकृत है. इसमें 49 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र  राज्य सरकारों की है जबकि 51 फीसदी हिस्सेदारी पांच गैर-सरकारी वित्तीय संस्थानों की है.

डिजिटल पेमेंट पर कैशबैक  डिस्काउंट दे सकती है सरकार: अगर उपभोक्ता भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम का चुनाव करते हैं तो खुदरा (बी-2 सी) लेनदेन के लिए चीज एवं सेवा कर (जीएसटी) की रियायती दर लगाई जा सकती है. यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए GST काउंसिल के गुलाम है. 4 मई होने वाली GST काउंसिल की 27वीं मीटिंग में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए बी2सी ट्रांजेक्शन में अगर 100 फीसद लेनदेन डिजिटल माध्यम से हुआ है तो उस पर 2 फीसद छूट देने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है.

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