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छोटी-बड़ी हर बीमारी का करते हैं इलाज ये योगासन

योग, भारत की प्राचीन जीवन-पद्धति है। तन, मन और आत्मा को एक साथ लाना ही योग है। इसके माध्यम से सिर्फ बीमारियों से ही मुक्ति नहीं मिलती बल्कि मानसिकता से जुड़ी परेशानियां भी दूर की जा सकती है हालांकि इस मॉडर्न लाइफस्टाइल में लोग खुद को फिट रखने के लिए जिम की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं लेकिन जो फायदा हमें योग से मिल सकता हैं, वह अन्य किसी विकल्प से नहीं।

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चिकित्सा शोधों ने ये साबित कर दिया है कि योग शारीरिक व मानसिक रूप से मानवजाति के लिए वरदान है। योग व मेडिटेशन में कमर दर्द, अार्थराइटिस, इम्यून सिस्टम, अस्थमा, ब्लड शुगर, हाई ब्लड प्रैशर, कोलेस्ट्रोल जैसे बड़ी परेशानियों को बिना दवा दूर करने की पूर्ण क्षमता है।

वहीं शास्त्रों के अनुसार,  योग में लगभग चौरासी लाख आसन सम्मिलित हैं लेकिन वर्तमान में बत्तीस आसन ही प्रसिद्ध हैं, जिनका अभ्यास शारीरिक, मानसिक और अाध्यात्मिक रूप से स्वास्थ लाभ व उपचार के लिए किया जाता है।

1. दमे के लिए अनुलोम-विलोम

यह आसन उन लोगों के लिए सबसे उत्तम है, जिन्हें सांस संबंधी कोई समस्या है। अनुलोम-विलोम आसन करने से फेफड़ों की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है, जिससे शरीर की कोशिकाओं को अधिक ऑक्सीजन मिलने लगती हैं। दमा के अलावा यह आसन एलर्जी, साइनोसाइटिस, नजला-जुकाम जैसे रोगों के लिए बहुत फायदेमंद है।

2. डिप्रैशन के लिए मेडिटेशन
मेडिटेशन यानी की ध्यान लगाना। यह पद्धति सिर्फ हमारे देश में ही नहीं, विदेशों में भी खूब तेजी से फैल रही है। दिनभर की भागदौड़, काम के प्रैशर आदि से आज 5 में 2 व्यक्ति मानसिक तनाव यानी डिप्रैशन का शिकार है। इससे मुक्ति पाने का सबसे बेहतर विकल्प है ध्यान लगाना। मेडिटेशन से आत्मिक शांति मिलती हैं। वहीं, मन की एकाग्रता के साथ कार्य शक्ति भी बढ़ती है।

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3.  हाई ब्लड प्रैशर के लिए शवासन

शव और आसन, दो शब्दों के योग से बना शवासन एक मात्र ऐसा आसन है, जिसे हर आयुवर्ग के लोग कर सकते हैं लेकिन हाई ब्लड प्रैशर के रोगियों के  लिए यह आसन वरदान से कम नहीं है। इसी के साथ यह आसन तनाव व अनिद्रा जैसी समस्याएं भी दूर करता है।

4. शरीर को लचीला बनाए हलासन
शरीर का लचीलापन रीढ़ की हड्डी पर निर्भर होता है। रीढ़ की हड्डी लचीली होगी तो शरीर अपने आप फलैक्सिबल होगा। हलासन करने से रीढ की हड्डी सदा जवान बनी रहती है। इसके अलावा इस आसन के नियमित अभ्यास से कब्ज, थायराइड का अल्प विकास, समय से पहले बुढ़ापा, दमा, कफ, रक्तविकार आदि रोग दूर होते हैं लेकिन ध्यान रहें कि रीढ संबंधी व गले में कोई गंभीर रोग होने की स्थिति में यह आसन ना करें।

5. साइटिका व पाचन तंत्र के लिए वज्रासन

भरपेट खाना खाने के तुरंत बाद सोने या टीवी देखने से पाचन संबंधी परेशानी होना आम है। अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद वज्रासन करें तो आपको डाइजेशन की परेशानी नहीं होगी। यह आसन साइटिका रोगियों के लिए उत्तम है। कमर से संबंधित किसी एक भी नस में सूजन आने से पूरे पैर में असहनीय दर्द होने लगता है, इसी समस्या को साइटिका कहते हैं। इसके अलावा मासिक धर्म अनियमितता, रीढ़ की हड्डी मजबूत, गैस, कब्ज व अपच संबंधी परेशानियों के लिए भी यह आसन फायदेमंद है।

 

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