Monday , May 20 2019

चिकित्सक व एलसीडी खंड के प्रमुख रबिंद्र बसकोटा ने कहा ये सब

नेपाल में सेहत अधिकारियों को कुष्ठ रोग के फिर से सिर उठाने का भय सताने लगा है 2018 में इसकी प्रसार दर 0.94 पहुंच जाने के बाद ऑफिसर चिंतित हैं काठमांडू पोस्ट की गुरुवार की रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 में हिमालय देश द्वारा बीमारी को जड़ से समाप्त करने की घोषणा के बाद नेपाल को कुष्ठ मुक्त राष्ट्र का दर्जा दिया गया था हालांकि अगर प्रसार दर कुल आबादी के एक प्रतिशत तक पहुंच जाती है तो राष्ट्र से यह दर्जा छिन सकता है विशेषज्ञ को भय है कि इससे नेपाल में इस बीमारी के पुनरुत्थान का पता चलता हैएक ऑफिसर ने बोला कि इसकी दर बढ़ सकती है क्योंकि वर्तमान आकंड़े प्रारंभिक डेटा से लिए गए हैं

समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, सेहत सेवा विभाग के महामारी विज्ञान एवं रोग नियंत्रण प्रभाग (ईपीसीडी) के कुष्ठ रोग नियंत्रण एवं अक्षमता (एलसीडी) खंड ने बोला कि प्रसार दर 2017 में 0.92 प्रतिशत  2016 में 0.89 प्रतिशत रही थी

चिकित्सक  एलसीडी खंड के प्रमुख रबिंद्र बसकोटा ने कहा, “अगर राष्ट्र यह दर्जा खोता है तो उसके लिए यह एक तगड़ा झटका होगा ” उन्होंने कहा, “कुष्ठ रोग की ऊष्मायन अवधि एक से 20 साल तक भिन्न-भिन्न होती है  इसके अधिक से अधिक रोगियों का उपचार कर इसके प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है ” उनके मुताबिक, “अगर यह चलन जारी रहा तो मात्र दो वर्षो में प्रसार दर एक प्रतिशत पर पहुंच जाएगी “