Tuesday , April 23 2019

पेशेवरों की भर्ती की उनकी कोशिशों पर पड़ा उल्टा असर

ब्रिटेन में रहने  कार्य करने वाले इंडियन डॉक्टरों  सेहत सेवा पेशवेरों ने यहां रहने  कार्य करने वाले यूरोपीय संघ के बाहर के नागरिकों पर लगने वाले सेहत उपकर में ‘अनुचित’ रूप से की गई दोगुना वृद्धि का विरोध कर रहे हैं ‘इमीग्रेशन हेल्थ सरचार्ज’ अप्रैल 2015 में पेश किया गया था  पिछले वर्ष दिसंबर से यह 200 ब्रिटिश पाउंड से बढ़ाकर 400 ब्रिटिश पाउंड प्रति साल कर दिया गया

यह राष्ट्र में गवर्नमेंट द्वारा वित्त पोषित राष्ट्रीय सेहत सेवा (एनएचएस) के लिए अलावा निधि एकत्रित करने के लक्ष्य से यह उपकर कामकाजी, एजुकेशन या परिवार वीजा पर ब्रिटेन में छह महीने से ज्यादा वक्त के लिए रहने वाले प्रत्येक आदमी पर लागू किया गया है

भारतीय मूल के डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली ब्रिटेन की सबसे बड़ी संस्था द ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ भारतीय ऑरिजिन (बीएपीआईओ) उपकर में वृद्धि पर पुन: विचार करने के लिए ब्रिटेन के गृह ऑफिस की लॉबिंग कर रही है उसकी दलील है कि इससे एनएचएस में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए हिंदुस्तान से अधिक संख्या में सेहत सेवा पेशेवरों की भर्ती की उनकी कोशिशों पर उल्टा असर पड़ेगा

संगठन के अनुसार, एनएचएस के 11 क्लिनिकल पदों में से एक अभी खाली है, नर्सिंग पदों के लिए आठ में से एक पद खाली है  यह संख्या बढ़कर वर्ष 2030 तक 2,50,000 पर पहुंच सकती है