Saturday , February 16 2019

गर्भवती स्त्रियों को कभी नही करना चाहिए ये काम

गर्भवती स्त्रियों के जहरीले रसायन के संपर्क में आने से उनके बच्चों के फेफेड़े में कठिनाई हो सकती है यह बात हाल ही में द लांसेट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट से उजागर हुई है स्पेन के ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता अपने शोध के दौरान माता-शिशु के 1,033 जोड़ों से प्राप्त तथ्यों का परीक्षण करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे कि बच्चों के जन्म से पहले पैराबेंस फ्थेलेट्स  परफ्लुओरोअल्काइल सब्सटैंस (पीएफएएस) के संपर्क  बच्चों के फेफड़े के अच्छा से कार्य न करने के बीच संबंध है  

इस तरह के खाने में पाया जाता है पीएफएएस
घरेलू उत्पादों  खाद्य पदार्थो की पैकेजिंग में पीएफएएस पाए जाते हैं भोजन  पानी के जरिए जीवों द्वारा पीएफएएस अवशोषित किया जा सकता है  नाभि के माध्यम से अजन्मे बच्चों तक जा सकता है

कैसे कर सकते हैं बचाव
विश्वविद्यालय के शोधकर्ता प्रोफेसर मार्टिन वृझीड ने कहा, “इन तथ्यों का जन-स्वास्थ्य के लिए जरूरी निहितार्थ है रोकथाम के तरीकों से रासायनिक पदार्थो के संपर्क से बचा जा सकता है इसके अतिरिक्त कठोर विनियमन  जन-जागरूकता के लिए उपभोक्ता वस्तुओं पर लेबल लगाने से बचपन में फेफेड़े बेकार होने से रोकने में मदद मिल सकती है  लंबे समय में सेहत में इसका फायदा मिल सकता है ”

डिप्रेशन है एक आम समस्या
गर्भवती स्त्रियों के बॉडी में बहुत सारे परिवर्तन आते हैं जिसके चलते तनाव हो जाना आम बात है वर्किंग वुमन ये तनाव ज़्यादा झेलती हैं इसके अलावा, कई स्त्रियों को लेबर पेन डिलीवरी से जुड़ी अन्य बातों को सोचकर भी तनाव हो जाता है इससे बचने के लिए आप योगा  मेडिटेशन का सहारा ले सकती हैं