Friday , January 18 2019

देश में कचरे का निपटारा करने का ये है बेहतर उपाय 

देश में कचरे का निपटारा करने का इतना बेहतर उपाय शायद ही किसी ने ढूंढकर निकाला हो, जिससे वह खुद-ब-खुद सोना  चांदी उगलने लगे. यह कारनामा राष्ट्र की सार्वजनिक कंपनी हिंदुस्तॉन कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) ने कर दिखाया है. खनिज पत्थरों से तांबा निकालने के बाद शेष रह गए बुरादे (कचरा) से दुर्लभ तत्वों को निकालने की यूनिट उसने तैयार कर ली है. अप्रैल से इसकी आरंभ करके वह सालाना कचरे का प्रबंधन कर 60 से 70 करोड़ रुपये भी कमाने लगेगा.Image result for देश में कचरे का निपटारा करने का ये है बेहतर उपाय नन के जरिए राष्ट्र में तांबा की जरूरतों को पूरा करने में हिस्सेदारी निभाने वाली एचसीएल ने ढाई सौ करोड़ रुपये से कचरा प्रबंधन की यूनिट तैयार की है. एचसीएल के चेयरमैन प्रबंध निदेशक संतोष शर्मा के मुताबिक पहले तांबा निकालने के बाद पत्थरों के बुरादे को एक निर्धारित जगह पर कचरे की तरह फेंक दिया जाता था. अब इसके प्रसंस्करण की यूनिट स्थापित हो चुकी है  अगले दो-तीन माह में यह प्रारम्भ हो जाएगी.

इसके जरिए एचसीएल रोजाना दस हजार टन कचरे से आठ-नौ सौ ग्राम सोना, पांच से आठ किलो चांदी, 450 टन तांबे का चूरा, 50-60 टन मैग्नेटाइट  4500 से पांच हजार टन सिलिका निकाल लेगा. बाकी रेत बचेगी, जो निर्माण काम में कार्य आ जाएगी. उन्होंने बोला कि इस तरह से पूरे कचरे का प्रबंधन हो जाएगा  पर्यावरण संरक्षित होगा. हमारा इरादा तांबा अयस्क के खदान में होने वाले खनन को पूरी तरह से कचरा मुक्त करना है.

60-70 करोड़ रुपये की सालाना आय होने का अनुमान

सार्वजनिक कंपनी के प्रबंध निदेशक शर्मा ने बोला कि अनुमान है कि कचरा प्रबंधन से सालाना हमें 60-70 करोड़ रुपये की आय होगी. इसके अतिरिक्त लोगों को रोजगार मिलेगा.खास बात ये है कि इसे पूरे कार्य में एक फीसदी भी प्रदूषण नहीं होगा. किसी तरह के केमिकल या भट्ठी का इस्तेमाल इस यूनिट में नहीं किया जा रहा है, बल्कि पहले चरण में पानी फिर चुंबक के जरिए दुर्लभ तत्वों को अलग किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि कचरा प्रबंधन का पहला ट्रायल खेतड़ी, राजस्थान में तांबा अयस्क यूनिट में किया गया था. लेकिन वहां पानी की समस्या के मद्देनजर कचरा प्रबंधन की यूनिट को मध्य प्रदेश में स्थापित किया गया. शर्मा ने स्पष्ट किया कि कचरे से दुर्लभ तत्वों को निकलाने की प्रक्रिया में पानी बर्बाद नहीं होता है. उसी पानी को दोबारा शोधन के दौरान इस्तेमालमें लाया जाता है. पानी के बाद चुंबकीय मशीन सभी तत्वों को अलग करती है. मैग्नेटाइट को लौह पदार्थों के कार्य में लाया जाता है. जबकि सिलिका शीशा बनाने में कार्य आती है.

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बताते चलें कि एचसीएल इस यूनिट से निकलने वाली रेत, सीलिका, मैग्नेटाइट, चांदी  सोना की बिक्री करेगा. पहले प्रति दस हजार टन  फिर प्रसंस्करण में मात्रा को बढ़ाया जाएगा.ऐसे में एचसीएल तांबा निकलाने की अपनी सभी यूनिट के कचरे का प्रबंधन कर पर्यावरण को संरक्षित करेगा. साथ ही आय को बढ़ाकर सार्वजनिक उपक्रम की क्षमता को मजबूत करेगा.

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