Tuesday , March 26 2019
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इस दिन प्रारम्भ होने वाला संसद का अंतिम सत्र

आम चुनाव से पहले 31 जनवरी से प्रारम्भ होने वाला संसद का अंतिम सत्र महज सांकेतिक नहीं होगा. मोदी गवर्नमेंट आम चुनावों में पार्टी की सियासत के लिए मुफीद माने जाने वाले अहम बिलों, मसलन तीन तलाक  नागरिकता संशोधन बिल पर फिर से हाथ आजमाएगी. इसके अतिरिक्त गवर्नमेंट उन बिलों की छंटनी करने में जुटी है, जिससे आम चुनाव से पहले गवर्नमेंट  पार्टी दोनों के लिए सुखद संदेश दिया जा सके. बताते चलें कि तीन तलाक बिल बीते दो सत्रों से जबकि नागरिकता संशोधन बिल बीते एक सत्र से राज्यसभा की देहरी पार नहीं कर पा रहा.Related image

एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक तीन तलाक, आधार कानून संशोधन  नागरिकता संशोधन सहित उन एक दर्जन बिलों की छंटनी का सिलसिला प्रारम्भ हो गया है, जिन्हें अंतिम सत्र में पेश करना है. गवर्नमेंट आम चुनाव से अच्छा पहले खासतौर से तीन तलाक बिल के जरिए मुस्लिम स्त्रियों  नागरिकता बिल के जरिए बहुसंख्यक समुदाय को सकारात्मक संदेश देना चाहती है. बताते चलें कि तीन तलाक बिल में जहां तलाक एक बिद्दत के लिए तीन वर्ष की सजा का, वहीं नागरिकता विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान  बांग्लादेश से शरणार्थी के रूप में हिंदुस्तान आए हिंदुओं, सिखों, पारसी  ईसाईयों को नागरिकता देना सरल करने का प्रावधान है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि किसी लोकसभा के अंतिम सत्र में सरकारें बिल पेश करने से परहेज करती रही हैं. पहले भी ऐसा हुआ है, लेकिन तब अंतरिम बजट की तारीख सत्र के अंतिम सप्ताह में तय की जाती थी. आमतौर पर अंतरिम बजट पेश होने के दो-तीन बैठकों के बाद सत्रावसान हो जाता था. इस बार सत्र के दूसरे दिन एक फरवरी को ही अंतरिम बजट पेश होगा.इसके बाद गवर्नमेंट के पास सात काम दिवस होंगे. गवर्नमेंट की योजना इन्हीं काम दिवसों में अपने समर्थक या समर्थन की आसार वाले मतदाता वर्ग को इन बिलों के जरिए साधने की है. सुप्रीम न्यायालय की ओर से फिर नयी तारीख देने के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश पर भी एक बार फिर से चर्चा है.