Monday , March 18 2019

5 फ़रवरी को सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने पर चर्चा करेगी गवर्नमेंट

इंटरमीडिएटरी नियमों को लेकर आलोचना झेल रही गवर्नमेंट अब सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने पर चर्चा करेगी. सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी) ने इस एरिया से जुड़े तमाम विशेषज्ञों समेत सभी हिस्सेदारों की मीटिंग 5 जनवरी को बुलाई है. इसमें भड़काऊ, अश्लील संदेश  फर्जी खबरें सोशल मीडिया से दूर रखने पर चर्चा की जाएगी.

फेसबुक, ट्विटर  यू-ट्यूब समेत तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये फैलने वाली फर्जी खबरों को रोकने के लिए हाल ही में गवर्नमेंट ने आईटी इंटरमीडिएटरी नियम-2018 जारी किए थे. इन नियमों का विरोध सभी विपक्षी राजनीतिक दलों ने किया था. प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि गवर्नमेंट इन नियमों के जरिये सोशल मीडिया पर नियंत्रण करना चाहती है.

गवर्नमेंट ने नए नियम लाने के लिए आईटी अधिनियम की धारा-79 में संशोधन का निर्णय किया था. इसका मसौदा जारी कर गवर्नमेंट ने 15 जनवरी तक लोगों से राय मांगी थी.इसके बाद राजनीतिक दलों के अतिरिक्त आईटी विशेषज्ञों ने भी गवर्नमेंट के इस कदम की आलोचना की थी. इसके चलते गवर्नमेंट ने सभी हिस्सेदारों से इंटरमीडिएटरी नियमों पर चर्चा करना तय किया  मीटिंग में विशेषज्ञों समेत अन्य को आमंत्रित किया गया है.

तीन दिन में जवाब जरूरी

सरकार द्वारा जारी मसौदे में बोला गया है कि सोशल मीडिया कंपनियों को 72 घंटे के अंदर गवर्नमेंट के सवालों का जवाब देना होगा. इसके लिए कंपनियों को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी  नोडल ऑफिसर की जिम्मेदारी कंपनी के हर पल अपडेट होने वाले संदेशों पर होगी.

पूरे मसौदे में राजनीतिक दलों का सर्वाधिक विरोध कंपनियों के मसौदे के उस पहलू पर था जिसमें गवर्नमेंट ने कंपनियों को मैसेज का एनक्रिप्शन (एक से दूसरे सिरे तक संरक्षित) कोड मुहैया कराने को बोला था. आईटी मंत्रालय का कहना है कि यह कवायद सोशल मीडिया पर प्रतिदिन आने वाली फर्जी खबरों पर अंकुश लगाने के लिए थी. साथ ही नागरिकों के डेटा सुरक्षा के पहलू का भी ख्याल रखा गया है.

भारत में पंजीकरण जरूरी

मसौदे में बोला गया है कि सभी कंपनियों को 50 लाख प्रयोगकर्ता से ज्यादा संख्या होने पर हिंदुस्तान में पंजीकरण कराना होगा  180 दिन तक डेटा रखना होगा. साथ ही कंपनियों को किसी कानून का उल्लंघन करने वाले, उत्पीड़न दर्शाने वाले, राष्ट्र की एकता-अखंडता या सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला, आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री जैसे पोस्ट को प्रतिबंधित करना होगा.

मंत्रालय ने दिया था निर्देश  

आईटी मंत्रालय ने पहले कई बार फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी व्हाट्सएप को फर्जी संदेशों पर रोक लगाने के लिए ताकीद किया था, लेकिन एनक्रिप्शन का हवाला देकर उसकी ओर से कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया. साथ ही फर्जी संदेश की उत्पत्ति कहां से हुई. यह जानकारी देने के बारे में भी कोई आश्वासन नही दिया गया. इन्हीं कारणों से गवर्नमेंट ने नए नियम बनाने का कदम उठाया था.