Monday , March 18 2019

निर्भया कांडः याद कर कांप जाती है रूह

16 दिसंबर 2012 को राष्ट्र को दहला देने वाले निर्भया बलात्कार कांड की आज छठी बरसी हैं राष्ट्र की राजधानी में हुए इस सामूहिक बलात्कार  हैवानियत ने राष्ट्र की आवाम के साथ-साथ सियासत को हिलाकर रख दिया 16 दिसंबर को दिल्ली के मुनीरका में 6 लोगों ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से गैंगरेप किया सामूहिक बलात्कार के बाद छात्रा के साथ हवस करने के बाद उसे सड़क पर फेंक दिया गया उसके साथ उसके दोस्त को भी अधमरी हालत में सड़क पर पटककर दोषी फरार हो गएImage result for निर्भया कांडः याद कर कांप जाती है रूह

जैसे ही ये समाचार फैली, उसके साथ ही राष्ट्र में गुस्सा  आक्रोश भी फैलता चला गया खासकर युवाओं के गुस्से ने दिल्ली की सियासत को भी गर्मा दिया इसी का परिणाम था कि पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने की ताबड़तोड़ कोशिश प्रारम्भ कर दिए जनआक्रोश की आंधी राष्ट्र के हर एक हिस्से में दिखाई दी कहीं सड़कों लोग मोमबत्ती लेकर प्रदर्शन करते दिखाई देते तो कहीं महिला सुरक्षा को लेकर कठोर कानून की आवाजें बुलंद होने लगी राष्ट्र की राजधानी में जंतर मंतर, इंडिया गेट, राजपथ तो पूरी तरह से लोगों से पटा दिखाई देता था  इस दौरान विरोध इतनी तीव्र हो गया कि लड़कियों ने राष्ट्रपति भवन तक कूच कर दी  पुलिस को उनपर भारी लाठीचार्ज तक करना पड़ा

महिलाओं पर हाल में हुई बर्बर यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर अगर नजर डाली जाए तो राष्ट्र की अंतर्रात्मा को झकझोर देने वाले निर्भया सामूहिक दुष्कर्म कांड के करीब 6 वर्ष बाद भी सड़कों पर महिलाएं असुरक्षित हैं सोलह दिसंबर मामले के बाद बड़े पैमाने पर जनाक्रोश पैदा हुआ था  इस वर्ष पांच मई 2017 को इस घटना के चार आरोपियों को सज़ा-ए-मौतसुनाई गई थी लेकिन छोटी सड़कों से लेकर राजमार्गों तक स्त्रियों के विरूद्ध इसी तरह की घटनाएं समाप्त होने का नाम नहीं ले रही