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‘साहित्य के महाकुंभ’ का 24 जनवरी से आगाज

 (जेएलएफ) में इस बार विज्ञान चर्चा के केंद्र में रहेगा जहां कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), आनुवंशिकी (जेनेटिक्स), मानव सभ्यता समाप्त होने के बाद का भविष्य, जलवायु बदलाव गल्प (क्लाइ फाई) जैसे विषयों पर सत्र आयोजित होंगे सोमवार शाम को जेएलएफ के 12वें संस्करण में शामिल कार्यक्रमों पर से पर्दा उठने के बाद सह निदेशक नमिता गोखले ने बताया कि इस वर्ष साहित्य उत्सव में ‘‘विज्ञान’’ पर ज्यादा जोर होगा, ऐसा विषय जिसपर वे आगे  कार्य करना चाहेंगे “पारो : ड्रीम्स ऑफ पैशन” की लेखिका ने कहा, “हमारी संसार बहुत तेजी से बदल रही है  इस वर्ष हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेनेटिक्स  हमारे ग्रह के भविष्य पर सत्र आयोजित करेंगेRelated image

एक नई शब्दावली आई है – क्लाई फाई इस विषय पर हम एक बेहद मनोरंजक सत्र आयोजित करने जा रहे हैं कि अगर मधुमक्खियां न रहें तो क्या होगा गोखले ने कहा, “मुझे लगता है कि इस वक्त हमारे राष्ट्र में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि अनुभवजन्य विचारों को प्रोत्साहित किया जाए ’’ नोबेल पुरस्कार विजेता वेंकी रामाकृष्णन “विज्ञान की आवश्यकता” , ब्रह्माण्ड विज्ञानी प्रियंवदा नटराजन ‘आकाश के मानचित्रण’  आर्टिफिशियल इंटेलिंजेंस के प्राध्यापक टॉबी वॉल्श ‘अभी भविष्य कैसा दिखता है’ विषयों पर बोलेंगे

पांच दिवसीय उत्सव 24 जनवरी से जयपुर के दिग्गी पैलेस में प्रारम्भ होगा साहित्य उत्सव में संसार भर के लेखक, विचारक, मानव अधिकारों के हिमायती, राजनेता, कारोबारी दिग्गज, खेल से जुड़े लोग एवं मनोरंजन जगत से जुड़े व्यक्तियों समेत करीब 350 वक्ता शिरकत करेंगे सोमवार शाम को आयोजित समारोह के जरिए एक झलक पेश करने की प्रयास की गई कि इस वर्ष यह महोत्सव आपके लिए क्या कुछ लेकर आने वाला है