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सरकार की ओर से कांग्रेस को दी गई है नसीहत

हिंदुत्व की झंडाबरदार भाजपा प्रदेश में आदि गुरु शंकराचार्य के नाम को लेकर नए विवाद में घिर गई है। प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार की ओर से जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखे जाने के बाद सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी का कहना है कि पूर्व सरकार में जब एयरपोर्ट का नाम आदि गुरु शंकराचार्य के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार में विचाराधीन है तो फिर प्रदेश सरकार को यह निर्णय लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या वह नहीं चाहती कि एयरपोर्ट का नाम आदि गुरु शंकराचार्य के नाम पर हो?Image result for सरकार की ओर से कांग्रेस को दी गई है नसीहत

हिंदुत्व के करीब जा रही कांग्रेस हिंदूवादी भाजपा को शंकराचार्य के मुद्दे पर असहज करने पर आमादा है। हालांकि शंकराचार्य को लेकर खुद का बचाव करते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर हमले बोलने शुरू कर दिए हैं। जहां पार्टी प्रदेश मंत्रिमंडल के फैसले के समर्थन में आ गई है तो वहीं सरकार की ओर से कांग्रेस को नसीहत दी गई है कि जब मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी, तब कांग्रेसी कहां सो रहे थे।

एक-दूसरे पर हो रहे आरोप-प्रत्यारोपों से प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सूत्रों के मुताबिक वाजपेयी और शंकराचार्य को लेकर भाजपा अजीब दुविधा में आ गई है। सियासी जानकारों की मानें तो प्रदेश सरकार ने बेशक निर्णय ले लिया है, लेकिन शंकराचार्य का नाम जुड़ जाने की वजह से केंद्र सरकार से प्रस्ताव को मंजूरी मिल पाएगी, इस पर संदेह है। उनके मुताबिक, समूचे राष्ट्र में हिंदुत्व के नाम पर फिर से सत्ता की राह तलाश रही भाजपा इस मामले में शायद ही कांग्रेस को अपनी घेराबंदी का अवसर देगी।

एयरपोर्ट का नामकरण आदि शंकराचार्य के नाम पर करने को लेकर कांग्रेस सरकार का न कोई शासनादेश है। न उसने ऐसी कोई घोषणा की थी। जब प्रस्ताव कैबिनेट में आया तो अधिकारियों के माध्यम से भी इस बारे में नहीं बताया गया। मुख्यमंत्री ने एयरपोर्ट का नाम अटल जी के नाम पर रखे जाने की जब घोषणा की थी, तब कांग्रेस कहां सोयी हुई थी। शंकराचार्य जी हिंदुओं के महान प्रतीक के रूप में माने जाते हैं। हमारी उनके प्रति अगाध श्रद्धा है। यदि कांग्रेस ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा था, तो कहीं तो कोई कागज होना चाहिए।
– मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता उत्तराखंड सरकार

अटल जी से हमारा कोई विरोध नहीं है। कांग्रेस की सरकार में एयरपोर्ट का नाम आदि गुरु शंकराचार्य के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। शंकराचार्य का उत्तराखंड से विशेष जुड़ाव रहा है। चार धामों में एक बदरीनाथ धाम की स्थापना उन्होंने की थी। केदारनाथ में वे समाधिस्थ हुए। उनके नाम पर एयरपोर्ट का नाम होता तो पूरे भारत वर्ष से इसका जुड़ाव होता। भाजपा हिंदुत्व की बात करती है, लेकिन आदि गुरु शंकराचार्य के नाम के प्रस्ताव पर उसने विचार नहीं किया। वह बताए कि केंद्र में बैठी उसकी सरकार ने अब तक प्रस्ताव पर निर्णय क्यों नहीं लिया। आखिर शंकराचार्य के नाम से उसे परहेज क्यों है।
– सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस

धन्य हो त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार। जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम आदिगुरू शंकराचार्य के नाम पर करने का फैसला किया गया था, केेंद्र सरकार को प्रस्ताव भी भेजा गया था। अब सरकार ने फैसला कर दिया है कि इसका नाम अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम पर होगा। हम अटल जी का सम्मान करते हैं। मगर जगदगुरू शंकराचार्य अपने स्थान पर हैं। हम देवभूमि और धार्मिक पर्यटन की बात करते हैं। जरा विचार करिए कि राज्य सरकार का ये फैसला भाजपा के हित में हो सकता है, मगर क्या राज्य के हित में है।
– हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री फेसबुक पोस्ट पर प्रतिक्रिया

आदि गुरू शंकराचार्य की केदारनाथ में भव्य मूर्ति का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कर रहे हैं। ये हमारे हिंदुत्व को अपने आप प्रकट करता है। हमें कांग्रेस के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। कैबिनेट की बैठक में अटलजी के नाम पर एयरपोर्ट का नाम रखने के निर्णय स्वागत योग्य कदम है। अटल जी ने राज्य का गठन किया। विशेष औद्योगिक पैकेज दिया। कांग्रेस का एतराज उसकी संकीर्ण का मानसिकता परिचायक है।
– नरेश बंसल, प्रदेश महामंत्री भाजपा

मैं प्रदेश से बाहर हूं। कैबिनेट बैठक के फैसले की मुझे जानकारी नहीं है। देहरादून आने पर प्रतिक्रिया दे पाऊंगा। एयरपोर्ट का नाम अटलजी के नाम पर रखे जाने का पार्टी स्वागत करती है।
– अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा

कांग्रेस दिखाए कि उन्होंने कहां प्रस्ताव भेजा है। वैसे भी कांग्रेस के शासनकाल में तमाम ऐसे प्रस्ताव भेजे गए हैं, जो कि राजनीति से प्रेरित थे। हमने जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया है। अब फैसला वहीं से होगा।